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ईमानदारी और आपसी दोस्ती, इस तेज गेंदबाजी आक्रमण का मुख्य हथियार है: भरत अरुण

के.श्रीनिवास राव इन दिनों शानदार प्रदर्शन कर रहा है। विपक्षी टीमों के पास पेस तिकड़ी-चौकड़ी का जवाब नहीं है। यह आक्रमण दुनिया में हर जगह अपनी धार दिखा रहा है। गेंदबाजी कोच के रूप में पर्दे के पीछे से इस पेस अटैक को सही लय में रखने और अच्छे प्रदर्शन के लिए लालायित रखने में मदद कर रहे हैं। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ लंबी बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि कैसे यह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण यहां तक पहुंचा। साथ ही उन्होंने इस आक्रमण के हर तीर की ताकत के बारे में बात की। गुलाबी गेंद के बारे में आपका क्या विचार है? इस गेंद पर लाल गेंद से ज्यादा लेकर है, तो शुरुआत में यह ज्यादा स्विंग होती है। लाल गेंद ज्यादा समय तक स्विंग होती रहती है। अगर आप इंदौर में हुए मैच को देखें तो हमारे गेंदबाजों ने 50-55 ओवर तक गेंद को स्विंग कराने में कामयाबी हासिल की। पिंक बॉल टेस्ट की बात करें यह मैच दिन में शुरू होता है। पिच काफी समय तक सूरज की रोशनी में रह चुकी होती है इस वजह से स्विंग और सीम की गुंजाइश कम होती है। इसमें दूसरे सेशन को पहले सेशन की तरह खेलना पड़ता है। बीते 22 महीनों में जो भारतीय तेज गेंदबाजी ने हासिल किया है वह वाकई शानदार है... भारतीय क्रिकेट में हमेशा अच्छे तेज गेंदबाज थे। हमारे पास मुनाफ पटेल था जो 140 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज रफ्तार से बोलिंग कर सकता था। आशीष नेहरा तेज गेंदबाजी करते थे। आरपी सिंह और इरफान पठान- ने जब शुरुआत की तो उनके पास भी रफ्तार थी। जब जहीर पहली बार आए तो वाकई बहुत तेज थे। बाद में जब उनकी रफ्तार कम हो गई तो उन्होंने अपने तरकश में कई तीर जोड़े। समय और अनुभव के साथ उन्होंने कई हुनर सीखे। जवागल श्रीनाथ अलग तरह के गेंदबाज थे। लेकिन जब आप बाकी अन्य गेंदबाजों को देखते हैं उन्होंने जब शुरुआत की उनकी रफ्तार 140 से ज्यादा थी लेकिन धीरे-धीरे वह नियमित रूप से 130-135 kmph की रफ्तार से गेंदबाजी करने लगे। जब रफ्तार कम हो जाती है तो काफी अंतर पड़ता है। जैसे तीर वे अपने तरकशन में जोड़ रहे थे, इस हिसाब से उनकी रफ्तार बढ़नी चाहिए था या कम से कम उतनी ही बनी रहनी चाहिए थी। जब हमने इस ओर ध्यान देना शुरू किया तो पाया कि कई कारण गेंदबाजों को प्रभावित कर रहे हैं। ज्यादा गेंदबाजी करना भी एक कारण था। वर्कलोड पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। पर्याप्त आराम की भी कमी थी। साथ ही कम गेंदबाजी भी एक महत्वपूर्ण कारण था। आखिर में हमें गेंदबाजों को निजी रूप से देखने की जरूरत थी। कोच, फिजियो और ट्रेनर के बीच बहुत बातचीत हुई। जब एक गेंदबाज आपको यह बताता है कि वह कैसा महसूस कर रहा है और अपने विचार, सोच और डर पूरी तरह आपको बताता है, तभी उसके साथ काम कर रहे लोग उसे सही तरह से मैनेज कर सकते हैं। किसी गेंदबाज के हुनर को समझना और मांझना, इससे आपका क्या मतलब है? हमने गेंदबाजों के लिए एक नियम बनाया है- 'प्रदर्शन में निरंतरता रखें' और 'बल्लेबाज को गेंद खेलने पर विवश करें'। इस साल की शुरुआत में पर्थ में हुए टेस्ट मैच में बुमराह के प्रदर्शन को देखें। उन्होंने बल्लेबाज को कई बार बीट किया लेकिन वह विकेट नहीं ले पाए। वह अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे और वह लगातार ऐसा करते रहे। यह एक तरह का निवेश था जो वह वहां कर रहे थे। मेलबर्न में खेले गए अगले टेस्ट मैच में उन्होंने पांच या चार विकेट लिए थे। उन्हें मालूम था कि विकेट हासिल करने के काफी करीब हैं। यह ईमानदारी कैसे तैयार हुई?यह शब्द आम तौर काफी इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जरूरी यह है कि इसके व्यापक अर्थ को समझा जाए। सिडनी टेस्ट से पहले इशांत ने आकर कहा कि वह सहज महसूस नहीं कर रहे हैं और इस वजह से इस मैच में नहीं खेल पाएंगे। टीम ने तीन तेज गेंदबाजों और कुलदीप यादव के साथ उतरने का फैसला किया। ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद, बुमराह को न्यू जीलैंड जाना था लेकिन वह आए उन्होंने कहा कि वह काफी थके हुए महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने पूरी ताकत लगा दी (ऑस्ट्रेलिया सीरीज) में। बेशक उन्होंने ऐसा किया था। उन्होंने ब्रेक लिया और घर चले गए, कुछ आराम किया और अगली सीरीज के लिए तरोताजा होकर लौटे। इसका काफी श्रेय विराट कोहली और रवि शास्त्री को जाता है जिन्होंने खिलाड़ियों के लिए ऐसा माहौल तैयार किया। मोहम्मद शमी का प्रदर्शन जादुई रहा है... शमी एक बहुत मजबूत इंसान हैं। वह रोजाना अनजाने में ही फास्टिंग करता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग। यह उनके लिए स्वाभाविक बात है। जब वह उस मुश्किल वक्त से गुजर रहे थे तो काफी परेशान थे। उनकी फिटनेस भी अच्छी नहीं थी और यहां तक कि फिटनेस टेस्ट में भी वह फेल हो गए थे। वह.... के काफी करीब पहुंच गए थे (शांत हो जाते हैं)। लेकिन उस वक्त ने उनके भीतर काफी गुस्सा भर दिया। इसी वक्त मैंने और रवि ने बैठकर उससे बात की। हमने उसे समझाया कि उसे अपने गुस्से को अपनी तेज गेंदबाजी पर केंद्रित करना होगा। हमने उसे समझाया कि उसे अपनी फिटनेस पर काम करना होगा। हमारा उससे कहना था कि उसे एक बैल की कड़ी मेहनत करनी होगी और उसने वैसा ही किया। हमें कुछ उनकी तकनीक के बारे में बताएं उनके पास वर्ल्ड क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ सीम पोजिशन है। अगर आप देखें कि वह कैसे गेंद को रिलीज करते हैं तो दुनिया में उनका कोई मुकाबला नहीं। 140 की रफ्तार से अगर गेंद टप्पा खाने के बाद मूवमेंट करती है तो बल्लेबाज के पास खुद को तैयार करने का बहुत कम वक्त होता है। यह सब उनकी सीम पोजिशन के कारण होता है। टप्पा खाने के बाद पिच से मिलने वाली लेट मूवमेंट उन्हें पुरानी और नई गेंद से इतना खतरनाक बनाती है। वह फिट हैं, उनका ऐक्शन बहुत अच्छा है, रनअप शानदार है, वह मजबूत हैं और विनम्र हैं। ये सभी गेंदबाज हमेशा विनम्र रहेंगे क्योंकि उनमें अच्छा प्रदर्शन करने की भूख है। बुमराह के बिना भी यह तेज गेंदबाजी आक्रमण बहुत खतरनाक लगता है...बुमराह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा हैं। वह टीम में आए और दुनिया ने उनकी प्रतिभा को देखा। इसने अन्य गेंदबाजों को भी प्रेरित किया। यह इस तेज गेंदबाजी आक्रमण की शुरुआत थी। यह सब पिछले साल साउथ अफ्रीका में शुरू हुआ। मुझे याद है कि रवि (शास्त्री) ने इन गेंदबाजों को कहा, 'अब से, आगे गेंदबाजी नहीं करनी।' दूसरी पारी में उन्होंने साउथ अफ्रीका को 131 पर ऑल आउट कर दिया। यह कहानी की शुरुआत थी जो अभी तक जारी है। इशांत ने 10 साल बाद भारत में पारी में पांच विकेट लिए...इशांत अपने आप में एक नए अवतार में नजर आ रहे हैं। अगर आप देखें कि बल्लेबाज चाहे दाएं हाथ का हो या बाएं हाथ का वह किस तरह गेंद को स्विंग कराते हैं। कैसे उनकी गेंद अंदर आती है या वह बाहर निकालते हैं- दुनिया में बहुत कम गेंदबाज ऐसा कर पाते हैं। बेन स्टोक्स ऐसे एक गेंदबाज हैं। लेकिन लगातार ऐसा करते रहना वाकई लाजवाब है। इशांत शायद दुनिया के कुछ गेंदबाजों में शामिल हैं जो लगातार ऐसा कर सकते हैं। ऐसा शायद उनकी खास रिस्ट पोजिशन की वजह से है। इसी वजह से वह निरंतर ऐसा कर पाते हैं। उनका कद भी उनके पक्ष में जाता है। इससे वह क्रीज के छोर पर जाकर ऑफ-स्टंप के बाहर की लाइन से गेंद को अंदर ला सकते हैं। और इस सबसे ऊपर उनके पास 90 से ज्यादा टेस्ट मैचों का अनुभव है। क्या सबके लिए अलग डायट प्लान है हां, इशांत शाकाहारी है। शमी को मीट पसंद है। बुमराह भी शाकाहारी है। भुवनेश्वर कुमार भी शाकाहार अधिक खाते हैं। हर आदमी का अलग प्लान है। मीट खाने से ही ताकत आती है यह एक घिसी-पिटी बात है। यह एक मिथ है। मीट आपको काफी प्रोटीन देता है। लेकिन प्लांट-बेस प्रोटीन भी उपलब्ध है। वाडा से स्वीकृत सप्लीमेंट मौजूद हैं। आम तौर पर शरीर के हर किलोग्राम वजन पर आपको एक ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सही मात्रा में प्रोटीन का सेवन करें। वैसे आपको बता दें दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान एक शाकाहारी है।


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