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छोटा सा 'राजकिरण', चाय से रोटी, गुजराती फैमिली... एक मिडिल क्लास परिवार का सपना हैं अक्षर

रूपेश रंजन सिंह, नाडियादअक्षर पटेल भले ही कुछ समय के लिए अपने घर में रहते हों लेकिन उनकी मां हर रोज उनके कमरे को सजाती हैं। प्रीति कहती हैं कि उनका बेटा भले ही कुछ दिन के लिए यहां आता है लेकिन वह उन्हें हर रोज अपने घर पर ही महसूस करती हूं। अक्षर ने अपनी करिश्माई गेंदबाजी से ऐतिहासिक पिंक टेस्ट में महज दो दिनों में ही भारत की जीत पक्की कर दी।

अहमदाबाद से सटा खेड़ा जिला, जिले में नडियाद नाम का छोटा सा शहर, शहर में राजकिरण नाम से छोटा सा बंगला और बंगले में एक 12 गुणा 12 का कमरा। यह कमरा जिसका है, वह साल में कुछेक महीने ही यहां रहता है और वो भी कुछ-कुछ दिनों के टुकड़ों में लेकिन प्रीति बेन पटेल उस कमरे को हर रोज सजाती हैं। प्रीति बेन पटेल भारतीय क्रिकेटर अक्षर पटेल की मां हैं। अक्षर पटेल जो टीम इंडिया के लिए खेल रहे हैं और अपनी स्पिन के दम पर लगातार कमाल कर रहे हैं।


नाडियाद से टीम इंडिया का सफर, एक मिडिल क्लास फैमिली का सपना हैं अक्षर पटेल

रूपेश रंजन सिंह, नाडियाद


अक्षर पटेल भले ही कुछ समय के लिए अपने घर में रहते हों लेकिन उनकी मां हर रोज उनके कमरे को सजाती हैं। प्रीति कहती हैं कि उनका बेटा भले ही कुछ दिन के लिए यहां आता है लेकिन वह उन्हें हर रोज अपने घर पर ही महसूस करती हूं। अक्षर ने अपनी करिश्माई गेंदबाजी से ऐतिहासिक पिंक टेस्ट में महज दो दिनों में ही भारत की जीत पक्की कर दी।



'राजकिरण' में कम ही रुक पाते हैं अक्षर
'राजकिरण' में कम ही रुक पाते हैं अक्षर

अहमदाबाद के करीब खेड़ा जिले के नाडियाद शहर के रहने वाले अक्षर पटेल के पारिवारिक बंगले का नाम 'राजकिरण' है। बंगले में एक 12 गुणा 12 का कमरा है, जिसमें अक्षर साल में कुछेक महीने ही रह पाते हैं। कभी घरेलू टीम के साथ तो कभी इंटरनैशनल टीम के साथ रहने के चलते अक्षर कम वक्त ही अपने घर पर बिता पाते हैं।



नाडियाद को अक्षर पटेल ने दी पहचान
नाडियाद को अक्षर पटेल ने दी पहचान

मशहूर संत राम मंदिर नडियाद शहर की पहचान है लेकिन अब इस शहर को अक्षर पटेल के शहर के नाम से भी जाना जाने लगा है। शहरवाले भी खुश हैं कि अक्षर ने उनके शहर को एक नई पहचान दी है। प्रीति कहती हैं, 'जब कोई मेरा परिचय अक्षर पटेल की मां कह कर कराता है तो मैं बहुत गर्व महसूस करती हूं। अक्षर सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं है, वह एक सपना है जो हर मिडिल क्लास फैमिली देखती है। मैं चाहूंगी जैसे हमारे सपने पूरे हुए, वैसे सभी के पूरे हों।'



पिता ने दिया अक्षर का साथ, 12 साल की उम्र में ही जॉइन की अकैडमी
पिता ने दिया अक्षर का साथ, 12 साल की उम्र में ही जॉइन की अकैडमी

प्रीति शुरुआत में नहीं चाहती थीं कि अक्षर क्रिकेट खेले। चोट का डर होने के साथ करियर की भी चिंता होती थी। उनके अनुसार वह कुछ अलग नहीं सोच रही थीं, मिडिल क्लास फैमिली में बच्चों के करियर को लेकर मां-बाप का चिंता करना कोई नई बात नहीं लेकिन अक्षर के पिताजी राजेशभाई पटेल, जो एक क्रिकेट प्रेमी हैं, ने उनका साथ दिया। अक्षर ने बोला कि उन्हें क्रिकेट पसंद है तो उन्होंने 12 साल की उम्र से ही अकैडमी भेज दिया।



घर आते हैं तो देर तक सोते हैं अक्षर, चाय से खाते हैं रोटी
घर आते हैं तो देर तक सोते हैं अक्षर, चाय से खाते हैं रोटी

प्रीति बताती हैं कि अक्षर जब भी घर आता है तो आराम ही करना चाहते हैं और देर तक सोते हैं। वह भी उसे नहीं जगाती हैं। घर आते हैं तो वही जिंदगी जीना चाहते हैं, जो वो पहले जीते थे। दोस्तों से मिलते हैं, वीडियो गेम खेलते हैं, अकैडमी जाते हैं और पूरे शौक के साथ चाय के साथ रोटी खाते हैं। (फोटो में अक्षर का भतीजा)



'शहर से बाहर नहीं जाना चाहते अक्षर'
'शहर से बाहर नहीं जाना चाहते अक्षर'

आईपीएल और फिर टीम इंडिया में खेलने के बाद अक्षर की नीलामी में कीमत जरूर बढ़ी है, लेकिन उनके और परिवार के पैर अब भी जमीन पर ही हैं। अक्षर आठ सदस्यों वाली जॉइंट फैमली में रहते हैं और सदस्यों की संख्या को देखकर ‘राजकिरण’ थोड़ा छोटा नजर आता है, लेकिन फिलहाल वे राजकिरण में रहना चाहते हैं। उनके अनुसार इस घर में जो सुकून है, वह शायद बड़े घर में ना मिले। प्रीति कहती हैं, 'छोटा है तो अच्छा है, हम सभी एक-दूसरे के करीब हैं, हर दूसरे मिनट किसी न किसी का चेहरा देखने को मिल जाता है। हम गुजराती लोग साथ रहने को ज्यादा भाव देते हैं। अब आगे अक्षर क्या करते हैं, पता नहीं लेकिन वह भी इस शहर से बाहर नहीं जाना चाहता।’





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